देशभक्ति का जज्बा, भ्रष्टाचार का फ़ौज पर असर

नीरज पांडे एक सुलझे हुए निर्देशक रहे हैं और उनकी फिल्मों से हमेशा एक एक्स फैक्टर की उम्मीद की जाती है. अभी तक निर्माता-निर्देशक के तौर पर वह अपने काम को लेकर खरे रहे हैं लेकिन, अय्यारी को लेकर वह थोड़े से कंफ्यूज नजर आते हैं. अय्यारी का मतलब ऐसा जासूस जो रूप बदलने में माहिर होता है.

नई दिल्ली: नीरज पांडे की अय्यारी का सबसे कमजोर पहलू है स्क्रिप्ट। 2 घंटा और 40 मिनट की इस फिल्म में 2 घंटा 25 मिनट तो फौज में हथियारों की दलाली और उसके अंजाम पर ही लगा दिए गए हैं. इस भ्रष्टाचार का फ़ौज पर और देश की जनता पर क्या असर पड़ेगा, इसे दिखाया गया मगर, क्लाइमेक्स में टांय टांय फिस्स. नीरज पांडे ने क्लाइमेक्स एक बिल्डिंग के करप्शन की बात करके खत्म कर दी है. प्रतीकात्मक रूप में किसी एक अफसर को खुद को गोली मार लेने से यह मामला स्पष्ट नहीं होता. कहना गलत नहीं होगा कि बात तो कर रहे थे कोहिनूर की लेकिन, कांच का एक टुकड़ा दिखाकर मामला समेट लिया गया. अपनी फिल्म में नीरज पांडे हमेशा एक बेहतर ट्रीटमेंट देते रहें हैं लेकिन, इस बार उनका स्क्रीनप्ले भी टुकड़े-टुकड़े में नजर आता है.
ऐसी ढेर सारी फिल्में है जिनमें सीक्रेट सर्विस एजेंट्स तो बनते हैं लेकिन, उनके पकड़े जाने की स्थिति में उन्हें गोली मार देने से भी परहेज नहीं किया जाता। और इस तल्ख़ हकीकत से सीक्रेट एजेंट्स भी बखूबी परिचित होते हैं. बावजूद इसके देशभक्ति का जज्बा उनमें इस कदर भरा होता है कि वो हर जोखिम लेने के लिए तैयार रहते हैं. चमकू और हाल ही में रिलीज़ हुई टाइगर ज़िन्दा है समेत कई सारी फिल्में बॉलीवुड में ऐसे ही दिलेर और जांबाज एजेंट्स पर बन चुकी हैं.

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