अप्रासंगिक कानून खत्म, आखिरी दौर में सरकारी मुहिम

अब तक 65 कानून रद्द किये जा चुके हैं. इस तरह अब तक 1657 कानूनों को या तो समाप्त किया जा चुका है या इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अब सरकार ने शेष बचे 167 कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है.

नई दिल्ली: साल 2014 में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार बनने के बाद ही प्रधानमंत्री ने घोषणा की थी कि सरकार ऐसे कानूनों की पहचान कर उन्हें समाप्त करेगी जिनकी आज की तारीख में कोई प्रासंगिकता नहीं बची है। सरकार लगातार इस पर काम भी कर रही थी. इस दिशा में प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से एक दो सदस्यीय समिति गठित की गई थी जिसे ऐसे कानूनों की पहचान करनी थी. समिति ने पुराने और अप्रासंगिक हो चुके 1824 कानूनों की पहचान की थी. इन कानूनों को रद्द किया जाना था. अब तक 1428 ACT समाप्त किये जा चुके हैं. इसके अतिरिक्त राज्यों से जुड़े 229 कानूनों को समाप्त करने के लिए विभिन्न राज्य सरकारों को भेजा जा चुका है. कानून मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इनमें से अब तक 65 कानून रद्द किये जा चुके हैं. इस तरह अब तक 1657 कानूनों को या तो समाप्त किया जा चुका है या इसकी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. अब सरकार ने शेष बचे 167 कानूनों को रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है.
केंद्रीय कानून मंत्रालय ने अप्रासंगिक और बेकार हो चुके ऐसे करीब 30 कानूनों की सूची तैयार की है जिन्हें अगले दौर में समाप्त किया जाना है. सूत्रों के मुताबिक जल्दी ही इन कानूनों को समाप्त करने का प्रस्ताव कैबिनेट में कानून मंत्रालय पेश करेगा. मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक या तो ये कानून इतने पुराने पड़ चुके हैं कि इनकी प्रासंगिकता समाप्त हो चुकी है. या फिर इनमें से कुछ कानून ऐसे हैं जिनके स्थान पर पूरी तरह नया कानून बनाया जा चुका है. लेकिन किन्हीं वजहों से इन्हें समाप्त नहीं किया गया है.

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