भारत की राजनीति, असुरक्षित महसूस करने लगे हिन्दू

भारत की राजनीति निश्चित ही हिन्दुओं के लिए पिछले 100 साल में घातक सिद्ध हुई है और अब भी यह घातक ही सिद्ध हो रही है.

Leaks: दुनिया की आबादी लगभग 7 अरब से ज्यादा है जिसमें से 2.2 अरब ईसाई और सवा अरब मुसलमान हैं और लगभग इतने ही बौद्ध. पूरी दुनिया में ईसाई, मुस्लिम, यहूदी और बौद्ध राष्ट्र अस्तित्व में हैं. हालांकि प्रथम 2 ही धर्म की नीतियों के कारण उनका कई राष्ट्रों और क्षेत्रों पर दबदबा कायम है. उक्त धर्मों की छत्रछाया में कई जगहों पर अल्पसंख्यक अपना अस्तित्व खो चुके हैं या खो रहे हैं तो कुछ जगहों पर उनके अस्तित्व को बचाने के प्रयास किए जा रहे हैं. कभी दुनिया के आधे हिस्से पर हिन्दुओं का शासन हुआ करता था, लेकिन आज कहीं भी उनका शासन नहीं है. एक जानकारी के मुताबिक पूरी दुनिया में अब मात्र 13.95 प्रतिशत हिन्दू ही बचे हैं. नेपाल कभी एक हिन्दू राष्ट्र हुआ करता था लेकिन वामपंथ के वर्चस्व के बाद अब वह भी धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है. अब वे एक ऐसे देश में रहते हैं, जहां के कई हिस्सों से ही उन्हें बेदखल किए जाने का क्रम जारी है, साथ ही उन्हीं के उप संप्रदायों को गैर हिन्दू घोषित कर उन्हें आपस में बांटे जाने की साजिश भी जारी है. अब भारत में भी हिन्दू जाति कई क्षेत्रों में अपना अस्तित्व बचाने में लगी हुई है. इसके कई कारण हैं क्योंकि जरूरी नहीं है कि यह एक धार्मिक समस्या ही हो, लेकिन इससे इककार भी नहीं किया जा सकता. ऐसे समय में जबकि एक ओर चर्च ने विश्व में ईसाईकरण का बिगुल बजा रखा है तो दूसरी ओर सुन्नी इस्लाम ने आतंक और कट्टरपंथ के जरिए अपने वर्चस्व और कब्जे वाले क्षेत्र से दूसरे धर्मों और समाज के लोगों को खदेड़ना शुरू कर दिया है. ऐसे में भारत में हिन्दू खुद को असुरक्षित महसूस न करने लगे तो क्या करें? यह बात संभवत: ऐसे हिन्दू भी स्वीकार नहीं करेंगे जिनका झुकाव वामपंथ और कथित रूप से कही जाने वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टियों की ओर ज्यादा है. लेकिन इस सच से हिन्दू सदियों से ही मुंह चुराता रहा है जिसके परिणाम समय-समय पर देखने को भी मिलते रहे हैं. इस समस्या के प्रति शुतुर्गमुर्ग बनी भारत की राजनीति निश्चित ही हिन्दुओं के लिए पिछले 100 साल में घातक सिद्ध हुई है और अब भी यह घातक ही सिद्ध हो रही है.
पश्चिम बंगाल और केरल भारत के दो ऐसे राज्य है जहां वामपंथ का पिछले 60 वर्षों से वर्चस्व रहा है. यहां पहले ईसाई मिशनरियों के चलते हिन्दू आबादी में बढ़े पैमाने पर सेंधमारी हुई जिसके बाद मुस्लिम-वामपंथी गठजोड़ ने राज्य में हिन्दुओं के अस्तित्व को संकट में डाल दिया. हिन्दू संगठन और धार्मिक संस्थानों पर लगातर हमलों का इन राज्यों में लंबा इतिहास रहा है. 1989 के बाद कश्मीर घाटी में हिन्दुओं के साथ हुए नरसंहार से कश्मीरी पंडित और सिख वहां से पलायन कर गए. कश्मीर में साल 1990 में हथियारबंद आंदोलन शुरू होने के बाद से हजारों पंडितों का कत्लेआम , बड़ी संख्या में महिलाओं और लड़कियों के साथ बलात्कार,. कश्मीर में आतंकवाद के चलते करीब 7 लाख से अधिक कश्मीरी पंडित विस्थापित हो गए और वे जम्मू सहित देश के अन्य हिस्सों में जाकर रहने लगे. असम कभी 100 प्रतिशत हिन्दू बहुल राज्य हुआ करता था. हिंदू शैव और शाक्तों के अलावा यहां हिंदुओं की कई जनजाति समूह भी थे. यहा वैष्णव संतों की भी लंबी परंपरा रही है. यहां बांग्लादेशी मुस्लिमों की घुसपैठ के चलते राज्य के कई क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की आबादी का संतुलन बिगड़ गया है. असम के लोग अब अपनी ही धरती पर शरणार्थी बन गए हैं। असम के इन लोगों में जहां हिन्दू जनजाति समूह के बोडो, खासी, दिमासा अपना अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहे हैं वहीं अन्य स्थानीय असमी भी अब संकट में आ गए हैं और यह सब हुआ है भारत की वोट की राजनीति के चलते. यहां माओवादी भी सक्रिय है जिनका संबंध मणिपुर और अरुणाचल के उग्रवादियों के साथ है. उन्हें नेपाल और बांग्लादेश के साथ ही भारतीय वामपंथ से सहयोग मिलता रहता है. आधुनिक भारत में इस तरह के सामाजिक परिवर्तन और राजनीतिक स्वार्थ के चलते हिन्दुओं में तनाव का बढ़ना चिंता का विषय है।

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