विशेष राज्य दर्जे का मुद्दा, मापदंड पर सवाल

वित्त आयोग ने पिछले वित्त आयोग (2010-15) की तुलना में दस फीसद ज्यादा कर राज्यों को वितरित करने की अनुशंसा की है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आंध्र प्रदेश को साफगोई से मना कर एक बेहतर संदेश दिया है.

नई दिल्ली: देश में विशेष राज्य के दर्जे का मुद्दा फिर से चर्चा में आ गया है. देश के 29 में से विशेष दर्जा प्राप्त 11 राज्य हैं वे सभी भौगोलिक रूप से पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. चाहे उत्तर-पूर्व के राज्य हों या जम्मू-कश्मीर या उत्तराखंड जैसे राज्य, ये सभी पहाड़ी व दुर्गम क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. वहीं दूसरी ओर आंध्र प्रदेश, बिहार, राजस्थान जैसे राज्य इस मापदंड पर खरे नहीं उतरते. दूसरा, निम्न जनसंख्या घनत्व के साथ-साथ जनजातीय आबादी भी होनी चाहिए. इस मापदंड पर भी राज्य खड़े नहीं उतरते. जहां तक आदिवासी जनसंख्या का सवाल है तो आंध्र प्रदेश, राजस्थान तथा ओडिशा तीन ऐसे राज्य हैं जहां आदिवासियों की तादाद अच्छी खासी है, विशेष दर्ज के लिए एक साथ सभी शर्तो को पूरा करना आवश्यक है.
आंध्र प्रदेश ऐसे समय में विशेष राज्य के दर्जे की मांग कर रहा है जब 14वें वित्त आयोग ने इस व्यवस्था को खत्म करने की अनुशंसा की है. वित्त आयोग ने पिछले वित्त आयोग (2010-15) की तुलना में दस फीसद ज्यादा कर राज्यों को वितरित करने की अनुशंसा की है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आंध्र प्रदेश को साफगोई से मना कर एक बेहतर संदेश दिया है. भारत के संघवाद पद्धति को संतुलित बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि किसी प्रावधान का राजनीतिक फायदा न उठाया जाए. अन्यथा राज्यों में एक दूसरे के प्रति असंतोष की भावना पैदा हो जाएगी, जो लोकतंत्र की सफलता में यकीनन एक रुकावट बनकर उभरेगी.

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