छत्तर मेला शुरू, मॉल कल्चर ने बदला मेले के स्वरूप

हर साल कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के साथ यह मेला शुरू हो जाता है और एक महीने तक चलता है. यहां मेले से जुड़े तमाम आयोजन होते हैं.

सोनपुर: विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला के उद्घाटन अपराह्न 4 बजे पर्यटन विभाग के मुख्य सांस्कृतिक पंडाल में बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी, मंत्री, सांसद, विधायक गणमान्य लोगों की उपस्थिति में सोनपुर मेले का विधिवत उद्घाटन किया. मेला के उद्घाटन के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों के लिए लंबी कवायद चली है. मेला ग्राउंड में सरकारी, गैर सरकारी प्रदर्शनियों, कला शिल्प ग्राम, उद्योग मंडप आदि के अलावा दुकानों, स्टॉलों का निर्माण युद्धस्तर पर जारी है. हर साल कार्तिक पूर्णिमा (नवंबर-दिसंबर) में लगने वाला यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है. यह मेला भले ही पशु मेला के नाम से विख्यात है, लेकिन इस मेले की खासियत यह है कि यहां सूई से लेकर हाथी तक की खरीदारी आप कर सकते हैं. मगर इस बार मेले में हाथियों की खरीद-बिक्री पर लगा दिया गया है. मॉल कल्चर के इस दौर में बदलते वक्त के साथ इस मेले के स्वरूप और रंग-ढंग में बदलाव जरूर आया है लेकिन इसकी सार्थकता आज भी बनी हुई है. 5-6 किलोमीटर के वृहद क्षेत्रफल में फैला यह मेला हरिहरक्षेत्र मेला और छत्तर मेला के नाम से भी जाना जाता है. हर साल कार्तिक पूर्णिमा के स्नान के साथ यह मेला शुरू हो जाता है और एक महीने तक चलता है. यहां मेले से जुड़े तमाम आयोजन होते हैं. इस मेले में कभी अफगान, इरान, इराक जैसे देशों के लोग पशुओं की खरीदारी करने आया करते थे. कहा जाता है कि चंद्रगुप्त मौर्य ने भी इसी मेले से बैल, घोड़े, हाथी और हथियारों की खरीदारी की थी. 1857 की लड़ाई के लिए बाबू वीर कुंवर सिंह ने भी यहीं से अरबी घोड़े, हाथी और हथियारों का संग्रह किया था. अब भी यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है. देश-विदेश के लोग अब भी इसके आकर्षण से बच नहीं पाते हैं और यहां खिंचे चले आते हैं.

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