चली गई फिल्मों की चांदनी, याद आएंगे वो लम्हे

श्रीदेवी ने जब बॉलीवुड में कदम रखा तो उन्हें हिंदी तक नहीं आती थी और एक्ट्रेस नाज उनके लिए डबिंग करती थीं. लेकिन चांदनी (1989) फिल्म में पहली बार उन्होंने खुद के लिए डबिंग की और यश चोपड़ा की ये फिल्म सुपरहिट रही थी. इसी तरह 1986 की हिट फिल्म नगीना के लिए श्रीदेवी को कास्ट किया गया. इस सफर में उन्होंने सदमा, हिम्मतवाला, मि. इंडिया, चांदनी, लम्हे और नगीना जैसी यादगार फिल्में दीं.

नई दिल्ली: 1975 में जूली फिल्म में लक्ष्मी की बहन का रोल निभाया था. उस दौर में शायद ही किसी की नजर उस लड़की पर गई होगी जो किसी भी मायने में लक्ष्मी के आगे नहीं टिक पाती थी. लेकिन 12 साल की ये लड़की साउथ की फिल्मों में लगातार काम कर रही थी, और वहां का बड़ा नाम बन चुकी थी. फिर 1978 में एक फिल्म सोलहवां सावन आई जिसका नाम सुनकर ही नाकभौंह सिकुड़ने लगती थीं, जिसमें श्रीदेवी के साथ रजनीकांत और कमल हासन नजर आए थे. ये फिल्म मॉर्निंग शो का ही हिस्सा बन कर रही गई. तमिल में फिल्म सुपरहिट रही थी, लेकिन हिंदी में जबरदस्त फ्लॉप रही. श्रीदेवी की बॉलीवुड जर्नी कामयाबी भरी है. शोहरत ने उनके कदम चूमे और अब तक वे अपने काम के दम पर बॉलीवुड में कायम थीं. श्रीदेवी का दुबई में निधन हो गया है. एक अदाकारा के तौर पर भारतीय सिनेमा में उनका योगदान अप्रतिम है, फिर वह चाहे एक्टिंग हो, डांसिंग हो या फिर चुलबुलापन, जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता
श्रीदेवी साउथ में अपनी एक्टिंग का डंका बजाती रहीं जबकि बॉलीवुड में 1983 तक कुछ भी क्लिक नहीं कर सका. लेकिन ये साल उनके लिए लकी रहा और नेहालता के कैरेक्टर ने उन्हें पहचान दिलाने का काम किया. फिल्म थी सदमा. जिसमें उन्होंने एक व्यस्क लड़की के अपनी याद्दाश्त खोने का किरदार निभाया था. इसी साल आई हिम्मतवाला ने उन्हें बॉलीवुड में स्थापित किया. जीतेंद्र के साथ उनकी जोड़ी सुपरहिट रही.

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