सुप्रीम कोर्ट के 4 जज़ो को दिखने लगी देश में असहिष्णुता

सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाकर हलचल मचा दी है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो जजों के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री ने चर्चा के लिए कानून मंत्री को बुलाया है.

नई दिल्ली: जैसे-जैसे 2019 के चुनाव नज़दीक आ रहे हैं, देश में अजीब ही प्रकार की स्थिति सी बनती जा रही है, अभी तक वामपंथियों, फिल्मबाज़ों, जेएनयू, उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी को ही देश में असहिष्णुता दिखती थी. अब तो ग़ज़ब ही हो गया है, सुप्रीम कोर्ट के 4 जज जिन्हे न्यायमूर्ति भी कहा जाता है उन्हें देश में लोकतंत्र की हत्या और असहिष्णुता दिखने लगी है. सुप्रीम कोर्ट के 4 जज को प्रेस कांफ्रेंस करने की ज़रूरत पड़ गयी और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ हल्ला बोल दिया और एलान कर दिया कि देश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है. ये 4 महानुभाव जज थे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन लोकुर और कुरियन जोसफ. तो वही अब इन 4 जज के खिलाफ खुद जस्टिस (रि.) आर एस सोढ़ी ने मोर्चा बुलंद कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों द्वारा मुख्य न्यायधीश की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करने को लेकर रिटायर्ड जस्टिस आरएस सोढी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि इन चारों जजों के खिलाफ महाभियोग चलाए जाए.रिटायर्ड जस्टिस आरएस सोढ़ी का कहना है कि इन चारों जजों को अब किसी भी तरह से उनका पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है. इन्हें पद से हटाया जाना चाहिए इनके द्वारा फैसला सुनाना उचित नहीं है. उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में यह ट्रेड यूनियनवाद गलत है. लोकतंत्र खतरे में यह उनके द्वारा कहना ठीक नहीं है, हमारे पास संसद है, कोर्ट है, पुलिस व्यवस्था है.
पिछले कई महीनों से राम मंदिर पर फैसला टाला क्यों जा रहा है, दिवाली पर पटाखे, शिवलिंग, राष्ट्रगान, आधार गैर ज़रूरी, स्कूलों में प्रार्थना और कई फैसले हिन्दू विरोध क्यों आये जा रहे हैं. कांग्रेस सरकार में इन सभी जज की नियुक्ति हुई, जज कुरियन जोसेफ वहीँ हैं जिन्होंने कहा था कि तीन तलाक के मुद्दे को न छेड़ा जाय. तीन तलाक से जुड़े मामले में उन्होंने कहा कि ट्रिपल तलाक एक धर्म विशेष समुदाय के लोगों का अभिन्न हिस्सा है और यह उनके व्यक्तिगत कानून का हिस्सा है. बड़े शर्म की बात है कि एक मुस्लिम महिला एक बेटी को जन्म देती है और उसे तीन तलाक दे दिया जाता है, और न्यायमूर्ति साहब कह रहे हैं कि तीन तलाक पर बात न की जाय. जस्टिस चमलेश्वर पर, ये वो जज है जो कांग्रेस के काफी करीबी माने जाते है और हाल ही में इन्होने आधार का भी विरोध किया था. इन्होने कहा था कि अगर किसी नागरिक के पास आधार कार्ड नहीं है तो उसे किसी तरह की सब्सिडी से दूर नहीं रखा जा सकता है. चाहे सरकारी पैसे की जितनी जमकर लूट मचे लेकिन आधार कार्ड को ज़रूरी न किया जाय वरना वो लाखों करोड़ों लोग सामने आ जायेंगे जो मुफ्त की सब्सिडी लिए घूम रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के चार सीनियर जजों ने मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर सवाल उठाकर हलचल मचा दी है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो जजों के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री ने चर्चा के लिए कानून मंत्री को बुलाया है.

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