संगम में माघ मेला शुरू, लाखों श्रद्धालु लगाते हैं डुबकी

2 जनवरी से लेकर 13 फरवरी तक चलने वाले इस माघ मेले में 6 प्रमुख पर्व हैं, जिनमे लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति पाएंगे. ये खास पर्व 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 16 जनवरी को अमावस्या, 22 जनवरी को बसंत पूर्णिमा और 31 जनवरी को माघ पूर्णिमा और 13 फरवरी को महा-शिवरात्रि.

इलाहबाद: उत्तर प्रदेश में इन दिनों सर्दियां अपने चरम पर है, और इसी के साथ संगम इलाहबाद में शुरू हो चुका है माघ मेला. माघ मेला हर साल उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में संगम तट पर लगता है, जिसे कल्पवास भी कहा जाता है. इस मेले में सिर्फ भारतीय ही नहीं बल्कि भारी तादाद में विदेशी भी नजर आते हैं. मेले को भव्य बनाने के लिए इस बार 15 घाट तैयार किये गये हैं, जिसमे करोड़ो श्रद्धालु संगम में डुबकी लगायेंगें. वर्ष 2019 में अर्धकुम्भ मेला आयोजित होगा, जिसके चलते इसे रिहर्सल माना जा रहा है. 2 जनवरी से लेकर 13 फरवरी तक चलने वाले इस माघ मेले में 6 प्रमुख पर्व हैं, जिनमे लाखों श्रद्धालु संगम में डुबकी लगाकर अपने पापों से मुक्ति पाएंगे. ये खास पर्व 14 जनवरी को मकर संक्रांति, 16 जनवरी को अमावस्या, 22 जनवरी को बसंत पूर्णिमा और 31 जनवरी को माघ पूर्णिमा और 13 फरवरी को महा-शिवरात्रि. आखिरी स्नान के दिन यहां के भरी तादाद में श्र्दालुयों के आने का अनुमान है.
माघ माह में चलने वाला यह स्नान पौष मास की पूर्णिमा से शुरू होकर माघ पूर्णिमा तक होता है. एक ट्रैवलर की नजर से देखे इलाहाबाद को क्या खास है इस मेले में? इस मेले में नहाने की तारीखें काफी महत्वपूर्ण होती है, इस दिन लाखों की तादाद में देशी-विदेशी श्रद्धालु गंगा नदी में अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए डुबकी लगाते हैं. भगवान शिव और देवी शक्ति के आदि-अनादि एकल रूप हैं भारत के ये शिवलिंग इस मेले का मुख्य आकर्षण कल्पवासी होते हैं, को पूरे माघ मेले के दौरान मेले मेले में लगे कैम्पों में रहते हैं. जब यहां कुम्भ और अर्ध कुम्भ मेले का अयोजन होता है, तो उस दौरान माघ मेला का आयोजन नहीं किया जाता है. हजारों की तादाद में यहां आने वाले श्रद्धालु होटल्स और संगम के तट के किनारे लगे कैम्पस में रह सकते हैं. यहां सरकार द्वारा भी कैम्प और टेंट का आयोजन किया जाता है.

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