तुम चले जाओगे तो सोचेंगे, गजल गायकी के बादशाह

मुंबई में विज्ञापनों में जिंगल्स और शादी में गाकर रोजी-रोटी की जुगाड़ करते थे. वहीं 1967 में इनकी मुलाकात चित्रा जी से हुई और दो साल साथ रहने के बाद दोनों ने 1969 शादी कर ली. जगजीत पाश्र्वगायन का सपना लेकर फिल्मी दुनिया में आए थे.

नई दिल्ली: गजल गायकी के बादशाह कहे जाने वाले जगजीत सिंह हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी मखमली आवाज के लोग आज भी दिवाने हैं. जगजीत सिंह का नाम लोकप्रिय गजल गायकों में शुमार है. गजलों को आम आदमी के बीच लोकप्रिय बनाने का श्रेय किसी को दिया जाना हो, तो जगजीत सिंह का ही नाम आता है. जगजीत का जन्म 8 फरवरी, 1941 को राजस्थान के गंगानगर में हुआ था. इनके पिता सरदार अमर सिंह धमानी भारत सरकार के कर्मचारी थे. संगीत उन्हें बचपन में ही पिता से विरासत में मिला था. जगजीत ने गंगानगर में पंडित छगन लाल शर्मा के सान्निध्य में दो साल तक शास्त्रीय संगीत सीखने की शुरुआत की. इसके बाद जगजीत ने जमाल खान साहब से ख्याल, ठुमरी और ध्रुपद की बारीकियां सीखीं. मुंबई में विज्ञापनों में जिंगल्स और शादी में गाकर रोजी-रोटी की जुगाड़ करते थे. वहीं 1967 में इनकी मुलाकात चित्रा जी से हुई और दो साल साथ रहने के बाद दोनों ने 1969 शादी कर ली. जगजीत पाश्र्वगायन का सपना लेकर फिल्मी दुनिया में आए थे. तब लोग तलत महमूद, मोहम्मद रफी के गीतों को पसंद करते थे. 1976 में जगजीत सिंह ने अपनी पहली हिट अलबम द अनफॉरगेटेबल्स रिलीज किया.
जगजीत अपने गायकी के सफर में अनेक विवादों में भी रहे थे. अपने संघर्ष के दिनों में इतने टूट गए थे कि इन्होंने कई प्लेबैक सिंगरों पर तीखी टिप्पणी कर दी थी. इसके बाद जगजीत ने राजनीति में भी अपनी दिलचस्पी दिखानी शुरू की. उनके हिट गानों में होठों से छू लो तुम मेरा गीत अमर कर दो, ओ मां तुझे सलाम, ये तेरा घर, ये मेरा घर, होशवालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज है, हाथ छूटे भी तो रिश्ते छूटा नहीं करते, कोई फरियाद तेरे दिल में दबी हो जैसे और मेरी आंखों ने चुना है तुझको दुनिया देखकर आदि सम्मिलित है. उन्होंने क्लासिकी शायरी के अलावा साधारण शब्दों में ढली आम-आदमी की जिंदगी को भी सुर दिए. 23 सितंबर, 2011 को ब्रेन हैमरेज होने के कारण जगजीत को मुंबई के लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया और 10 अक्टूबर, 2011 की सुबह 8 बजे वहीं उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया

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