बजट से आम लोगों को कई उम्मीदें, सरकार की प्राथमिकता होगी कृषि

बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी 9 फरवरी और दूसoरा चरण पांच मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा. इस तरह से पहले सत्र में 10 दिन दूसरे सत्र में करीब 23 दिन सदन का कामकाज चलने की संभावना है. इस क्रम में केंद्र एक फरवरी को अपना आखिरी बजट पेश करने जा रही है.

नई दिल्ली: केंद्र सरकार का आखिरी बजट से आम लोगों के साथ ही कई सेक्टरों को भी उम्मीदें हैं. आम बजट से क्या उम्मीदें हैं और ये किस तरह आम आदमी की जेब पर असर डाल सकता है. देश में बढ़ रही बेरोजगारी, महंगाई, पेट्रोलियम पदार्थों के दाम समेत आदि मुद्दे मुंह फैलाए खड़े हैं. बजट 2018 से प्रमुख मांगों में अप्रत्यक्ष कर या जीएसटी को कम करना, इनकम टैक्स में छूट देना ताकि लोग और खर्च कर सकें, ग्रामीण इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्टर का विकास करना, रोजगार मुहैया कराने पर सुविधाएं प्रदान करना, कॉर्पोरेट टैक्स कम करना आदि हैं. किसानों की प्रमुख मांगों में साहूकारों द्वारा दिए जाने वाले कर्ज पर रोक लगाना, किसानों को कम दरों पर आसानी से सरकारी कर्ज उपलब्ध कराना, कीटनाशकों और बीजों पर जीएसटी की दरें कम करना और नकली दवाओं पर रोक लगाना आदि हैं. इससे किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिलने के साथ ही इस क्षेत्र का जीडीपी में योगदान बढ़ सकता है और आयात पर निर्भरता कम होने से आम लोगों के लिए भी कृषि उत्पाद सस्ते हो सकते हैं.
बजट सत्र का पहला चरण 29 जनवरी 9 फरवरी और दूसoरा चरण पांच मार्च से 6 अप्रैल तक चलेगा. इस तरह से पहले सत्र में 10 दिन दूसरे सत्र में करीब 23 दिन सदन का कामकाज चलने की संभावना है. इस क्रम में केंद्र एक फरवरी को अपना आखिरी बजट पेश करने जा रही है. सरकार के दावे और हकीकत के बीच की दूरी सत्ता पक्ष के लिए परेशानी का सबब हो सकती है. खेती, खलिहानी और किसानों की स्थिति भी सरकार के लिए परेशानी का सबब है. मोदी सरकार ने वादा किया था कि वह किसानों को उसके उत्पादन का उचित मूल्य दिलाएगी, किसानों की लागत में 50 फीसदी की कमी आाएगी तथा इन सुधारों से किसानों की आय में दोगुना इजाफा होगा. लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और है. इसी तरह से सरकार की तमाम फ्लैगशिप योजनाओं को लेकर भी विपक्ष हमलावर है. विपक्ष लगातार सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना कर रहा है.

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