हनुमान की भक्ति, कलियुग में शक्ति

भगवान् श्रीराम ने कहा था कि- सुन कपि तोहि समान उपकारी, नहि कोउ सुर, नर, मुनि, तुनधारी. बल और बुद्धि के प्रतीक हनुमानजी राम और जानकी के अत्यधिक प्रिय हैं. इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं.

Leaks: भारतीय संस्कृति में मानव जीवन के लक्ष्य भौतिक सुख तथा आध्यात्मिक आनंद की प्राप्ति के लिए अनेक देवी देवताओं की पूजा का विधान है जिनमें पंचदेव प्रमुख हैं. पंच देवों का तेज पुंज श्री हनुमानजी हैं. माता अन्जनी के गर्भ से प्रकट हनुमानजी में पांच देवताओं का तेज समाहित हैं. अजर, अमर, गुणनिधि, सुत होहु- यह वरदान माता जानकीजी ने हनुमानजी को अशोक वाटिका में दिया था. स्वयं भगवान् श्रीराम ने कहा था कि- सुन कपि तोहि समान उपकारी, नहि कोउ सुर, नर, मुनि, तुनधारी. बल और बुद्धि के प्रतीक हनुमानजी राम और जानकी के अत्यधिक प्रिय हैं. इस धरा पर जिन सात मनीषियों को अमरत्व का वरदान प्राप्त है, उनमें बजरंगबली भी हैं. उनको मारुतिनंदन, पवनपुत्र, केशरीनंदन आदि अनेकों नामों से पुकारा जाता है. उनका एक नाम वायुपुत्र भी है, उन्हें वातात्मज भी कहा गया है अर्थात् वायु से उत्पन्न होने वाला. वे सभी कलाओं में सिद्धहस्त एवं माहिर थे. वे हर युग में अपने भक्तों को अपने स्वरूप का दर्शन कराते हैं और उनके दुःखों को हरते हैं. वे मंगलकर्ता एवं विघ्नहर्ता हैं.
हनुमानजी का जन्म का मूल्यांकन भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण से किया है. हनुमान का चरित्र एक लोकनायक का चरित्र है और उनके इसी चरित्र ने उन्हें सार्वभौमिक लोकप्रियता प्रदान की है. हनुमानजी पूरे भारतवर्ष में सर्वाधिक पूजे जाते हैं और जन-जन के आराध्य देव हैं. बिना भेदभाव के सभी हनुमान अर्चना के अधिकारी हैं. अतुलनीय बलशाली होने के फलस्वरूप इन्हें बालाजी की संज्ञा दी गई है. देश के प्रत्येक क्षेत्र में हनुमानजी की पूजा की अलग परम्परा है. हनुमानजी तंत्र शास्त्र के महान पंडित हैं। समस्त देवताओं में वे शाश्वत देव हैं. परम विद्वान एवं अजर-अमर देवता हैं. वे अपने भक्तों का सदैव ध्यान रखते हैं. उनकी तंत्र-साधना, वीर-साधना है. वे रुद्रावतार और बल-वीरता एवं अखंड ब्रह्मचर्य के प्रतीक हैं. अतः उनकी उपासना के लिए साधक को सदाचारी होना अनिवार्य है.

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