चुनौतियों के चक्रव्यूह में कांग्रेस, बदला कलेवर

कांग्रेस अब सिर्फ देश के 2 बड़े और 2 छोटे राज्यों में सत्ता पर मौजूद है. देश की सिर्फ 7% आबादी पर कांग्रेस पार्टी की सरकार का राज है. और राहुल उन नरेंद्र मोदी के सामने खड़े हैं, जिनकी अगुवाई में बीजेपी राज्य दर राज्य जीत हासिल करती जा रही है.

नई दिल्ली: देश की सबसे पुरानी पार्टी, सबसे बड़ी राजनीतिक संकट काल से गुजर रही है. तब राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार हो रहे पार्टी के अधिवेशन में बहुत कुछ बदला हुआ नजर आया. कांग्रेस के अब तक के अधिवेशन में जहां नेता परंपरातगत रूप से मंच पर गद्दों के ऊपर मसनद लगाए बैठे दिखते थे. लेकिन राहुल राज वाली कांग्रेस के पहले अधिवेशन में तेवर, कलेवर बदला हुआ नजर आया. मंच पर किसी की तस्वीर नहीं सिर्फ पार्टी का निशान और सारे नेता मंच से नीचे बैठे दिखे. नया नारा दिया गया है. वक्त है बदलाव का. आज बतौर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने सिर्फ 4 मिनट का भाषण दिया. ये बताते हुए कि समापन सत्र में पार्टी के लिए नई दिशा वाला भाषण दूंगा.
कोशिश की अब कमांडर राहुल ही हैं और आजादी से पहले बनी कांग्रेस नये नारे के साथ आजादी के आंदोलन से बड़ी चुनौती को जीतने राहुल की अगुवाई में उतर रही है. राहुल गांधी ने कहा कि जाति, धर्म के नाम पर देश में नफरत, गुस्सा फैलाया जा रहा है. देश को बांटा जा रहा है, देश हर धर्म, जाति का है, कांग्रेस हर एक को साथ रखने का काम करेगी. स्टेडियम में बैठकर अपने ही कार्यकर्ताओं के सामने हुंकार भरना आसान होता है. लेकिन राहुल गांधी के सामने चुनौती बड़ी है.

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