उपचुनाव में सहानुभूति वोट, मैदान में रिश्तेदार प्रत्याशी

उपचुनाव में महागठबंधन की जीत होती है तो यह पहला अवसर होगा, जब बगैर लालू प्रसाद के राजद को जीत मिलेगी. इसका श्रेय तेजस्वी यादव को मिलेगा. इसके उलट यदि इस चुनाव में एनडीए की जीत होती है तो जदयू-बीजेपी गठजोड़ इसे जनता का भरोसा मिलने के तौर पर पेश करेगा.

पटना: अररिया में राजद सांसद तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद चुनाव हो रहे हैं. यहां तस्लीमुद्दीन के पुत्र सरफराज बतौर राजद प्रत्याशी मैदान में हैं. सरफराज के सामने बीजेपी के प्रदीप सिंह मैदान में हैं. दोनों जीत का दावा कर रहे हैं. वहीं आनंद भूषण पांडेय के निधन के बाद रिक्त हुई भभुआ विधानसभा सीट पर उनकी पत्नी रिंकी रानी पांडेय चुनाव लड़ रही है. यहां से महागठबंधन के उम्मीदवार शंभू पटेल उनके सामने मैदान में हैं. इसी तरह जहानाबाद सीट से राजद नेता मुंद्रिका यादव के निधन के बाद खाली हुई है. इस सीट से मुंद्रिका यादव के बेटे सुदय यादव चुनावी मैदान में हैं. इस सीट से जदयू से अभिराम शर्मा बतौर एनडीए उम्मीदवार उन्हें टक्कर दे रहे हैं.
अररिया लोकसभा और भभुआ-जहानाबाद विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव के बहाने राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार एनडीए और महागठबंधन आमने सामने हैं. इन तीनों सीटों पर विजयी प्रत्याशी के रिश्तेदार मैदान में हैं, लिहाजा सहानुभूति वोट की भी चर्चा है. उपचुनाव में महागठबंधन की जीत होती है तो यह पहला अवसर होगा, जब बगैर लालू प्रसाद के राजद को जीत मिलेगी. इसका श्रेय तेजस्वी यादव को मिलेगा. इसके उलट यदि इस चुनाव में एनडीए की जीत होती है तो जदयू-बीजेपी गठजोड़ इसे जनता का भरोसा मिलने के तौर पर पेश करेगा. तीन सीटों में दो महागठबंधन के पास हैं जबकि एनडीए के पास एक सीट है.

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