सियासी यात्राओं का दौर, राजनीतिक पारा गर्म

तेजस्वी यादव संविधान बचाओ न्याय यात्रा के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के प्रयास में जुट गए हैं. बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष कौकब कादरी भी एक यात्रा पर निकलने की योजना बनाई है. मुख्यमंत्री अपनी समीक्षा यात्रा के दौरान जहां विकास कार्यों को सरजमीं पर देखने के बहाने लोगों से मिल रहे हैं, वहीं राज्य में चल रही विकास योजनाओं की अधिकरियों के साथ बैठक कर समीक्षा भी कर रहे हैं.

पटना: चुनाव में अभी एक साल से ज्यादा का समय है, लेकिन राजनीतिक दलों ने अभी से ही आगामी चुनावों में अपनी-अपनी नैया पार लगाने के लिए यात्राओं का सहारा लेना शुरू कर दिया है. बिहार में इन सियासी यात्राओं का दौर कोई है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की विकास योजनाओं की समीक्षा यात्रा जहां अब अंतिम दौर में है, तो वहीं बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और राजद प्रमुख लालू यादव की राजनीतिक विरासत संभालने के प्रयास में जुटे तेजस्वी यादव संविधान बचाओ न्याय यात्रा के जरिए अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने के प्रयास में जुट गए हैं. बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष कौकब कादरी भी एक यात्रा पर निकलने की योजना बनाई है. मुख्यमंत्री अपनी समीक्षा यात्रा के दौरान जहां विकास कार्यों को सरजमीं पर देखने के बहाने लोगों से मिल रहे हैं, वहीं राज्य में चल रही विकास योजनाओं की अधिकरियों के साथ बैठक कर समीक्षा भी कर रहे हैं. अपनी यात्रा के दौरान सभी नेता बिहार के सभी जिलों में पहुंचने की कोशिश करते हैं. जद (यू) के प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि नीतीश अपने राजनीतिक जीवन में प्रारंभ से ही यात्राओं के दौरान लोगों के बीच जाते रहे हैं. वह कहते हैं कि नीतीश की यात्राओं का मुख्य उद्देश्य सरकार द्वारा किए गए कार्यो को लोगों के बीच बताना और सरजमीं पर उसकी हकीकत जानना है.
पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी ने कटिहार से अपनी न्याय यात्रा की शुरुआत की है. अपने यात्रा के पहले चरण में तेजस्वी सीमांचल के कटिहार, पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जाएंगे जहां वे जनसभा को संबोधित करेंगे. उल्लेखनीय है कि तेजस्वी इसके पूर्व भी जनादेश अपमान यात्रा कर चुके हैं. राजद उपाध्यक्ष शिवानंद तिवारी का कहना है कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का हक है. बिहार और देश में आज जो स्थिति बनी हुई है, उसे लेकर तेजस्वी भी संविधान बचाओ न्याय यात्रा के जरिए लोगों के बीच गए हैं. बहरहाल, बिहार में नेताओं की इन यात्राओं के जरिए सियासी पारा गर्म हो गया है. अब देखना है कि इन सियासी यात्राओं का लाभ किस सियासी दल को अधिक मिल पाता है.

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