सुप्रीम का निर्देश, देश के घरेलू मुकाबलों में बिहार को दी जाए मंजूरी

साल 2000 के बाद से बीसीसीआई की फुल मेंबरशिप ना होने की वजह से बिहार की टीम रणजी ट्रॉफी में भागीदारी नहीं रह रही थी. अदालत का कहना था कि उन्हें रणजी ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में भागीदारी करने दी जाए.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने करीब 18 साल बाद बिहार की क्रिकेट टीम, रणजी ट्रॉफी जैसे देश के घरेलू मुकाबलों में भागीदारी करती दिखेगी. सुप्रीम कोर्ट ने बीसीसीआई को निर्देश जारी किया है कि अगले सीजन से बिहार की टीम को घरेलू टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेने की मंजूरी दी जाए. साल 2000 के बाद से बीसीसीआई की फुल मेंबरशिप ना होने की वजह से बिहार की टीम रणजी ट्रॉफी में भागीदारी नहीं रह रही थी. अदालत का कहना था कि बिहार के क्रिकेटरों के हित में यह जरूरी है कि उन्हें रणजी ट्रॉफी जैसे बड़े टूर्नामेंट्स में भागीदारी करने दी जाए. हालांकि बिहार क्रिकेट ऐसोसिएशन की फुल मेंबरशिप का फैसला सुप्रीम कोर्ट के बनाई प्रशासकों का समिति यानी सीओए करेगी जिसके मुखिया विनोद राय है.
बीसीसीआई ने बिहार के जूनियर क्रिकेटरों और महिला क्रिकेट टीम के बोर्ड के सभी टूर्नामेंट्स में भागीदारी करने की मंजूरी दे दी थी और इसके लिए साल 2017-18 के मौजूदा सीजन के शेड्यूल में भी बदलाव किया गया था. अब अदालत के इस आदेश के बाद बिहार के मुख्य टीम को भी रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लेना सुनिश्चित हो गया है. साल 2001 में जब बिहार के निकलकर झारखंड नया राज्य बना था तब बीसीसीआई ने बिहार की जगह झारखंड के बोर्ड की फुल मेंबरशिप दी थी जिसके बाद से ही बिहार की टीम रणजी ट्रॉफी में भाग नहीं ले पा रही थी.

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