एनडीए की एकजुटता, गठबंधन के बिखरते कुनबे

चुनाव में महागठबंधन के लिए नासूर न बन जाए, इससे पहले समस्तीपुर की सभा में राहुल तेजस्वी ने एक मंच पर आकर यह मैसेज देने की कोशिश की कि महागठबंधन में सब कुछ ऑल इज वेल है

पटना:बिहार में चुनावी सरगर्मियां शुरू हुई, एनडीए ने खुलकर अपनी एकजुटता दिखाई. पहले एक साथ आकर अमित शाह, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान सीटों की संख्या तय की फिर एक साथ बिना किसी हो-हंगामे के सभी सीटों पर एक साथ उम्मीदवारों के नाम भी तय कर दिए. लेकिन वहीं महागठबंधन में शुरू से ही एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप हुआ. किसको कितनी सीटें मिलेगी, कौन किस सीट पर चुनाव लड़ेगा. इस पर महागठबंधन में बिहार से लेकर दिल्ली तक जमकर खींचतान हुई. सीट शेयरिंग पर तेजस्वी को कई बार दिल्ली जाकर राहुल गांधी से बात करनी पडी. अंत-अंत तक दरभंगा, मधुबनी जैसी सीटों पर तो विवाद रहा. इन तमाम खींचतान और विवादों का असर चुनाव प्रचार में भी पड़ा कि कांग्रेस ने नेता अपने उम्मीदवार के प्रचार में जा रहे थे जबकि तेजस्वी सिर्फ अपने उम्मीदवार के प्रचार में. लेकिन एनडीए के प्रचार का आलम यह था कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह अपने उम्मीदवारों से पहले सहयोगी दलों के उम्मीदवारों के लिए चुनावी मैदान में कूद पड़े.
चुनाव में महागठबंधन के लिए नासूर न बन जाए, इससे पहले समस्तीपुर की सभा में राहुल तेजस्वी ने एक मंच पर आकर यह मैसेज देने की कोशिश की कि महागठबंधन में सब कुछ ऑल इज वेल है. महागठबंधन में राहुल तेजस्वी की एकजुटता इस समय इसलिए जरुरी थी कि जनता के बीच गलत मैसेज जा रहा था कि सभी पार्टियां अपने अपने कुनबे में ही चुनाव प्रचार कर रही हैं.समस्तीपुर में सभा करने के बाद भी राहुल गांधी ने अपने पुराने नेता और निर्दलीय चुनाव लड़ रहे शकील अहमद को घास तक नहीं डाली. बिहार में 19 सीटों पर अब तक चुनाव हुए हैं. जबकि 21 सीटों पर चुनाव बाकी है. ऐसे में महागठबंधन का देर से खेला गया यह दांव जनता पर कितना असर छोडेगी,

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