विद्या की देवी मां सरस्वती की वन्दना, बुद्दि का वरदान

पूजा का शुभ समय सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 16 मि0 तक है. मां सरस्वती की पूजा विधि मां सरस्वती की पूजा विधि देवी भागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने की थी. वसंत पंचमी का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास मनाया जाता है.

नई दिल्ली: ऋग्वेद में मां सरस्वती का वर्णन प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। अर्थात ये परम चेतना है. सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका है. हममें जो आचार और मेघा है उसका आधार मां सरस्वती ही है. ऋतुराज बसंत के आने से केवल इंसान ही नहीं बल्कि देवता भी प्रसन्न हो जाते हैं. आम तौर पर बसंत पंचमी या श्रीपंचमी के दिन विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा की जाती है. लोग सुबह-सुबह पीले वस्त्र पहनकर मां सरस्वती का ध्यान करते हैं और उनकी अराधना करते हैं. मान्यता है कि इसी दिन मां सरस्वती का जन्म हुआ था. इस दिन मां सरस्वती से विद्या और बुद्दि का वरदान मांगा जाता है क्योंकि मां सरस्वती बुद्दि, ज्ञान, शक्ति, कला और संगीत की देवी हैं, बिना इनके आशीष के कोई भी इंसान प्रगति-पथ पर आगे नहीं बढ़ सकता.
वसंत पंचमी का पर्व 22 जनवरी को मनाया जायेगा. इस दिन सफेद, पीले व वासन्ती रंग के कपड़े पहनकर सरस्वती पूजन करने का विधान है. इसके साथ ही मां सरस्वती को मीठा, खीर व केसरिया चावल का भोग लगाया जाता है. धूप, दीप, फल-फूल इत्यिादि के साथ मां सरस्वती की वन्दना व पूजा की जाती है. इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है. शुभ मुहूर्त - पूजा का शुभ समय सुबह 7 बजकर 40 मिनट से 12 बजकर 16 मि0 तक है. मां सरस्वती की पूजा विधि मां सरस्वती की पूजा विधि देवी भागवत के अनुसार देवी सरस्वती की पूजा सर्वप्रथम भगवान श्री कृष्ण ने की थी. वसंत पंचमी का त्यौहार बड़े हर्षोल्लास मनाया जाता है. मां सरस्वती देवी का विशेष पूजन-अर्चन किया जाता है.

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